Kriya Sharira MCQ Set – 10
#1. आत्मा मनसः संयुज्यते मन इन्द्रियेण इन्द्रियं ततः ज्ञानम् ।
#2. अंगमर्द लक्षण इस कारण से उत्पन्न होता है।
#3. तावुभावपि संश्रित्य वायुः पालयति प्रजा संदर्भ
#4. शब्दसहिष्णुता’ लक्षण है ।
#5. तैलबिंदु परिक्षा में मूत्र में मनुष्य कि आकृति तयार होने पर यह दोष होता है।
#6. चरकाचार्य के अनुसार आर्तवकाल का कालावधि है ।
#7. ECG curves are called as
#8. Following conditions cause excessive bleeding, Except
#9. सुश्रुत नुसार रक्त का वीर्य है।
#10. ग्रंथापकर्षण शक्ती’ इस का कार्य है।
#11. Highest concentration of potassium is present
#12. अस्थिवृद्धि में चिकित्सा का प्रावधान है।
#13. मृद्वल्पकपिलश्मश्रुलोमकेशा’ लक्षण इस प्रकृति का है ।
#14. अल्पशुक्रता’ लक्षण दिखायी देता है।
#15. दिवास्वाप से स्त्रोतसदुष्टी होती है।
#16. Estrogens are mainly excreted in
#17. सुकुमार उपचारता इस धातु सारता का विशेष लक्षण है।
#18. Neuromuscular transmiter is
#19. अग्नि के चार भेद इस पर आधारित है। (च.वि. 8 / 12 )
#20. Blood group B is having antibody
#21. Sperms develop motility in
#22. मेदधातु का मल है। (शारंगधर)
#23. The cardiac centers are located in the
#24. अवस्थितगति’ इस प्रकृति की विशेषता है।
#25. प्रीति’ इस धातु का प्राकृत कर्म है।
#26. Lifespan of platelets are
#27. वातशोफ ऑज की किस अवस्था का लक्षण है।
#28. सबसे गंभीरतम् धातु है ।
#29. Myopia is corrected by
#30. योग्य जोडियाँ लगाए । a) कर्णमल b) जिव्हामल c) अक्षिमल d) नासामल >> i) दूषिका (ii) खमल iii) सिंघानक iv) काकुलक
#31. This fibre type is susceptible for anaesthesia.
#32. शरीर में रसधातु का प्रमाण रहता है।
#33. विश्वमित्र पर्याय है।
#34. Normal BMR value for adult male is
#35. यह द्रव्यधातु का मल है।
#36. Cardiac cycle duration in man is
#37. Which are the conditions responsible to cause lymphocytosis.
#38. रक्तक्षय से होने वाले वातवृद्धि का शमन करने के ….. रस सेवन करने कि इच्छा होती है। (अ.हृ.) लिए…
#39. P’wave is absent in ECG in
#40. The SGOT rises after all events below expect-
#41. Brocas area is the centre for…… situated in central cortex
#42. रसरक्तसंबहन की हृदय-शरीर हृदय ऐसी चक्रवत गती इस आचार्य का अवदान है।
#43. चरकनुसार रसधातु से शुक्रधातु निर्माणार्थं काल लगता है।
#44. त्वचा और मांसधातु के बीच में रहने वाला धातु है ।
#45. Diabetes mellitus
#46. चक्षु एवं बुद्धि वैशेषिक यह आलोचक पित्त के प्रकार इस संहिता में वर्णित है।
#47. वाग्भटाचार्य ने शुक्र का वर्ण बताया है।
#48. अनवस्थित् स्कन्धपाणिपादा’ लक्षण वातप्रकृति में इस गुण के कारण।
#49. अवधुतो अग्नि’ इस का कार्य है।
#50. शरीर, इंद्रिय, सत्व एवं आत्मा के संयोग को कहते है।
#51. …..is responsible for humoral immunity
#52. Person possesser A agglutinogen and beta agglutinin having
#53. अनवस्थित भ्रू’ लक्षण वात प्रकृति में इस गुण के कारण होता है।
#54. मज्जाधातु क्षय का लक्षण है।
#55. शारंगधर नुसार कुष्ठ विकार होनेवाले त्वचा प्रकार की जाडी होती है।
#56. कंठ प्रदेश में चार स्वरवह स्त्रोतस होते है। ऐसा वर्णन इस
#57. Liver is covered by thin fibrous connective tissue cover called as
#58. मां…..च
#59. पित्त के तिक्त रस का वर्णन इस आचार्य ने किया है।
#60. अस्थि को चिपका हुआ मांस खाने की इच्छा होती है।
#61. यह मांसज विकार है।
#62. प्रेतकाय’ का समावेश इस मानस प्रकृति में होता है।
#63. . स्तम्भते…….. ( हेमाद्रि टीका )
#64. पित्तवृद्धि का लक्षण है ।
#65. वाग्भट नुसार पित्तदोष का मुख्य स्थान है।
#66. दक्षिणायण में उत्पन्न बनस्पतियों में यह रस बलवान होता है।
#67. The term brain of the gut used to refer to the
#68. गुल्म’ ब्याधि धातु प्रदोषज विकार है।
#69. Blind spot is called
#70. आचार्य अरुणदत्त ने ‘ओजोवृद्धिकर’ कर्म बताया है।
#71. श्लक्ष्ण………। (हेमाद्रि)
#72. शरद ऋतु में इस दोष का प्रशमन होता है।
#73. मोह, प्रलाप यह ओज के इस अवस्था में उत्पन्न लक्षण है।
#74. This vitamin acts as an antioxidant
#75. वाग्भट के सिद्धान्त अनुसार श्रीखंड (मधुर) खाने में लेना चाहिए। (सु.सू.46/495)
#76. Lungs tidal volume is
#77. अग्न्याशय में अग्रि का प्रमाण है।
#78. प्रोबद्ध पिण्डिका’ इस प्रकृति का लक्षण है।
#79. In the following types of cell division, centriole is non functional
#80. वक्त्र शोधयति’ इस रस का कर्म है।
#81. इन्द्रियदौर्बल्य’ लक्षण इस दोष दुष्टी में मिलता है।
#82. सुश्रुतनुसार शुक्रवह स्त्रोतस का स्थान है।
#83. This oil can be used
#84. Yellow spot is called
#85. During intra uterine growth, 3 rd week to 3 rd month RBC are formed in this place
#86. In which of following hemorrahagic tendency is absent.
#87. चरक अनुसार शुक्रधातु का मल है।
#88. ……….. उपस्तंभ वाय्वाप्रिधारण च ।
#89. हेमंत ऋतु में इस गुण के कारण पित्त का शमन होता है।
#90. पित्तधरा कला को मज्जाधरा कला कहते है ।
#91. अग्नि एवं पित्त को इस आचार्य ने अभेद बताया है।
#92. In ECG position of lead V, is
#93. वसा का अंजली प्रमाण है।
#94. Rods receptors are sensitive to
#95. शारंगधर ने इस कफ प्रकार को ‘स्नेहन’ कहा है।
#96. त्रिदोष प्रकोष’ लक्षण आचार्य सुश्रुत ने इस अध्याय में वर्णित की है।
#97. ओज एवं तेज के बारह स्थान इस आचार्य ने माने है।
#98. स्वास्थ्य’ की व्याख्या में इसका समावेश नहीं है।
#99. अस्थी एवं संधि इस स्त्रोतस के मूल स्थान है।
#100. The valve that prevents backflow of blood into the right atrium is the .
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