Kriya Sharira MCQ Set – 1
#1. Conversion from degree celsius ‘C to degree . fahrenheit of
#2. मनशिला का समावेश इस स्कंद मे होता है।
#3. ECF is measured by
#4. देहधारण’ इस धातु का श्रेष्ठ कर्म है ।
#5. शारंगधर नुसार स्त्री में बहिर्मुख स्त्रोतस है।
#6. पुरुष इस गुण से युक्त होता है।
#7. रसन’ इंद्रिय अधिष्ठान कि देवता है।
#8. षटुक्रियाकाल का वर्णन किया है।
#9. वसंत ऋतु में इस रस का आधिक्य होता है ।
#10. न च बाल्येऽपि अतिरोदन न च लौल्य । (काश्यप)
#11. छादनी’ पर्याय नाम है।
#12. Hydrostatic pressure of the fluid in the Bowman’s capsule is
#13. Cell drinking is the synonims of
#14. जल का शोषण और पुरीष मलनिर्मिती यह इस अवयव का महत्वपूर्ण कार्य है।
#15. ओज को सर्वधातुस्नेह कहा है।
#16. इस आचार्य ने क्लोम को फुफ्फुस माना है।
#17. अम्ल रस संबंधी असत्य विधान बनाये। ।अम्ल रस यह….. है।
#18. श्लेष्परक्तविकार इस धातुवृद्धि से होते है। (संग्रह)
#19. ताम्रसमेचकमवत् वर्ग होता है।
#20. Kidneys produce
#21. Somatostatin inhibits the secretion of
#22. When light is thrown in one eye there is ………. of pupil in…………yes.
#23. During starvation loss of following EXCEPT
#24. शोणित का सुवर्णवत वर्ण इस आचार्य ने बताया |
#25. उष्माकृत पित्त इस पित्त प्रकार संबंधी कहा है ।
#26. सर्वगुणोत्पन्न इस प्रकृति का लक्षण है।
#27. निम्न में से रस का पर्याय नहीं है।
#28. स्वप्न के प्रकार है । च. सू. 5/43
#29. Function of endoplasmic reticulum of cell is
#30. कार्श्य स्थौल्य निमित्ता) (सु. सू. 21 )
#31. The vessels where exchange of nutrients occur
#32. वर्षाशीत आतपप्रवृद्धः ‘ इस पित्त की विशेषता है।
#33. नाडी परीक्षा नामक ग्रंथ के रचयिता है।
#34. Normal protein level of CSF is
#35. सुश्रुत नुसार मज्जा व शुक्र धातु का महाभुत अधिक्य है।
#36. देव, पितृ, ऋषि आदि में इस पित्त प्रकार का प्रभाव अधिक होता है। (भेल) ।
#37. रसरक्तसंबहन की हृदय-शरीर हृदय ऐसी चक्रवत गती इस आचार्य का अवदान है।
#38. अकाली शयन एवं जागरण से वायु का प्रकोप होता है।
#39. शरीर में दूसरे क्रमांक के धातु का अंजली प्रमाण है ।
#40. Time period required for one complete cardiae cycle.
#41. पुरीषवह स्त्रोतस की चिकित्सा इस व्याधिवत करनी चाहिए।
#42. शार्ङ्गगधर के अनुसार प्राण वायु का स्थान होता है।
#43. Stuart factor is
#44. यह द्रव्यधातु का मल है।
#45. यह वायु अग्नि का पालन करता है।
#46. आहार विहार स्त्रोतोदुष्टी का सामान्य कारण है।
#47. मुहुर्मुहुः प्रवृत्ति’ लक्षण इस अवस्था में होता है।
#48. रंजक पित्त का स्थान नहीं है।
#49. अच्छ पित्त का उदीरण इस अवस्थापाक मे होता है।
#50. उदके विसर्पवत् प्रशस्तम् । (चक्रपाणि)
#51. Among the given find out false sentence
#52. शरीर का तर्पण, वर्धन, धारण एवं यापन इससे होता है।.
#53. मेदोधरा कला है।
#54. Higher levels of ‘HbA1c’ are found in people is more prone to
#55. योग्य जोडियाँ लगाए । a) कर्णमल b) जिव्हामल c) अक्षिमल d) नासामल >> i) दूषिका (ii) खमल iii) सिंघानक iv) काकुलक
#56. यह पित्त प्रकार अवभासिनी छाया को प्रकाशित करता है।
#57. सुश्रुत ने शरीर के कुपित दोषों को इस कर्म द्वारा जीतने की बात कही है। (सु.चि.33/3)
#58. स्थिर शरीर इस देश लक्षण की विशेषता है।
#59. पित्त के तिक्त रस का वर्णन इस आचार्य ने किया है।
#60. निम्न में से पित्त दोष के शुभ-अशुभ कर्मों की गलत जोडी पहचानीये ।
#61. इस में महाललाट लक्षण होता है ।
#62. सुश्रुतानुसार ‘उदवहन’ कौनसी वायु का कार्य है ?
#63. पित्तधरा कला को मज्जाघरा कला इस आचार्य ने कहा है।
#64. शस्त्र, क्षार एवं अग्नि कर्म से इस स्त्रोतोगत व्याधि की चिकित्सा करते है।
#65. काश्यपनुसार सात्विक, राजसिक एवं तामसिक काय के प्रकार क्रमश: है ।
#66. मज्जासार व्यक्ति का लक्षण है।
#67. सुश्रुत के अनुसार अस्थिवह स्त्रोतस का मूलस्थान है।
#68. उत्साहभ्रंश’ इस का कर्म है।
#69. रक्तधातु में ‘गैरीकोदकप्रतिकांश’ गुणधर्म आता है।
#70. शान्तेऽग्री प्रियते, युक्ते चिरं जीवत्यनामयः । संदर्भ है।
#71. आचार्य हारित नै प्रकृति का वर्णन किया है।
#72. शारंगधराचार्य ने पित्त के इस प्राकृत रस का वर्णन अतिरिक्त किया है।
#73. चक्रपाणी अनुसार ‘विशेषस्तु विपर्ययः’ है।
#74. Lateral geniculate body is concerned with
#75. तार्क्ष्य अनुकत्व इस प्रकृति से है ।
#76. श्लेष्मरक्तमांसविकारप्रायै….. विकार |
#77. In normal adult, ratio of anatomical to physiological dead space air is
#78. प्रकृति’ का पर्याय है।
#79. These cells are responsible for secretion of acid in kidney
#80. चित्रिणी नाडी गुण प्रधान होती है।
#81. आनुप देश में दोषो से संबंधित रोग अधिक होते है।
#82. पिपिलिकामाक्षिणामऽस्कंदि च…… । दुषित रक्त का लक्षण है।
#83. This constitute of bile prevents the formnation of gall stone
#84. कफ दोष के पाच प्रकार का वर्णन सर्वप्रथम आचार्य ने किया है।
#85. शारंगधर नुसार मज्जाधातु का उपधातु है।
#86. निम्न में से गलत ऋतु-रस संबंध चूनिऐ ।
#87. Aqueous humor
#88. हितकर एवं अहितकर आहार प्रकार… .. भेद से होते है।
#89. पित्त व अभि में इस गुण का फरक है।
#90. अस्थिसारता का लक्षण है।
#91. संग्रहकार के आहार कल्पना में इसका समावेश नहीं है।
#92. औषध पाचन काल है।
#93. इस के अनुसार क्षीण दोष रोग उत्पादन में सक्षम नही होते.
#94. Largest fuild compartment in the body is
#95. वाग्भट नुसार पित्तदोष का मुख्य स्थान है।
#96. शीतगुण के साथ मंदगुण की वृद्धि होने पर शरीर में होता है।
#97. ……..are the sites of protein synthesis in cells
#98. पित्तधरा कला को मज्जाधरा कला कहते है ।
#99. पित्तवृद्धि का लक्षण है।
#100. वाग्भटानुसार पित्त के 7 गुण एवं वात के 7 गुणों में से कितने ‘गुण समान है।
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