Ashtanga Hridayam Set – 2
#1. पित्तजन्य विकारों में …. गुणप्रधान द्रव्यो से वमन करते है। … अ.सू.18.21
#2. दिवास्वाप कौनसे ऋतु में पथ्य है? अ.सू.7.56-
#3. क्षारमिश्रित लवण तैल से अभ्यंग करना …… वेगधारण से होने वाले विसर्प की चिकित्सा उपक्रम है।
#4. ऋतुसन्धि काल कितने दिनों का होता है? अ.सू.3.56
#5. स्नान के गुण क्या है। अ.सू.2.16
#6. श्रृंगवेराम्बु पान कौनसी ऋतु में करते है ? अ.सू. 3.22.
#7. विशेषादर्शसां पथ्यः’ यह कौनसे द्रव्य के गुण है? अ.सू.6.113
#8. मधुर लघु स्निग्ध द्रव हिम आहार कौनसे ऋतु में पथ्य है ? अ. सू. 3.28
#9. ब्रीहि का समावेश कौनसे वर्ग में होता है? अ.सू.6.7
#10. स्निग्धसोमात्मक शुद्धमीषदलोहितपीतकम ….. वर्णन है।
#11. धूमधुम्ररजोमंदास्तुषाराविल मंडलाः। इस ऋतु का लक्षण है।
#12. विषाक्त दुग्ध में वर्ण की रेखायें दिखायी देती है। अ.सू. 7.7
#13. आमलकी की दोषच्नता क्या है ? अ.सू. 6.157
#14. विषाक्त अन्नसेवन से माक्षिका में… लक्षण उत्पन्न होता है। अ.सू. 7.14
#15. हेमाद्रि नुसार स्नेह की हसीयसी मात्रा का पाचनकाल कितना है? अ.सू. 16.17
#16. शिरोबस्ति का अधिकतम प्रयोग काल कितने दिन है? अ.सू.22.31
#17. अग्निनाश यह रक्त का लक्षण है। अ.सू. 11.9
#18. वाग्भटनुसार शल्यगतियाँ कितनी है? अ.सू. 28.1
#19. विषसंज्ञा निम्न में से किसे प्राप्त है। अ.सू.8.14
#20. शीत ऋतु में संचित दोषों का निर्हरण…ऋतु में करते है। अ. सू. 4.35
#21. वर्षा ऋतु में…. जल का सेवन करते है। अ.सू.3.46
#22. वाग्भट नुसार सद्यस्नेह कितने है ? अ.सू.16.40
#23. प्रीष्म ऋतु में संचित दोष अभ्रकाल में शोधित करना चाहिये।
#24. रसक्रिया निम्न में से किस का प्रकार है? अ.सू. 22.13
#25. ‘अर्कविलोकन’ यह विशेष चिकित्सा इस वेगधारण में प्रयुक्त है।
#26. रुक्ष आहार सेवन कौनसे ऋतु में पथ्य है। अ.सू.3.56
#27. विषाक्त व्यक्ति में हृद्विशोधनार्थ ….. का प्रयोग करते है। अ. सू. 7.27
#28. गुल्मइद्रोगसंमोहाः. … विधारितात।’
#29. बिड्भेदी आहार… वेगावरोध की चिकित्सा है। अ.सू.4.5
#30. ‘सद्योभुक्त इवोद्वार’ कौनसे अजीर्ण का लक्षण है? अ.सू. 8.25
#31. विषजनित विकारों में कौनसे धान्य का प्रयोग करते है ? अ. सू. 6.13
#32. अपतर्पण प्रयोग के कितने प्रकार है ? अ.सू. 8.20
#33. अश्मरी व्याधि में …… शिम्बीधान्य का प्रयोग करते है ? अ.सू.6.19
#34. रक्तपित्तातिसार में विशेषतः कौनसे दुग्ध का प्रयोग करते हैं ? अ. सू. 5.24
#35. अर्श प्रपीडनार्थ …. यन्त्र का उपयोग करते है। अ.सू.25
#36. जृम्भा वेग विधारण के लक्षण …. .के समान होते है ?.सू.4.15
#37. अर्श रोगी को जलपान कराना चाहिये।
#38. ‘संस्कारात्सर्वरोगजित्’ यह कौनसे स्नेह का गुणधर्म है? अ.सू.5.56
#39. लाघवकरम् कौनसे महाभूत का कर्म है ? अ.सू. 9.9
#40. मूर्धतैल के प्रकार कितने है? अ.सू. 22.23
#41. अवबाहुक व्याधि में कौनसा नस्य उपयुक्त है? अ.सू.20
#42. प्रत्यहं क्षीयते श्लेष्मा तेन वायुश्च वर्धते’ ….. ऋतु का लक्षण है।
#43. ‘शशांक किरण ‘भोजन इस ऋतु में लेने का वर्णन है।
#44. वर्षाऋतु में स्नेहनार्थ कौनसे स्नेह का प्रयोग करते है ?
#45. वाग्भट नुसार सर्वश्रेष्ठ फल कौनसा है ? अ.सू.6.115
#46. ‘अङ्गभङ्गारुचिग्लानि’ यह कौनसे वेगावरोध के लक्षण है? अ.सू.4.11
#47. रसैरसौ तुल्यफल .को कहते है। अ. सू. 9.22
#48. वाग्भटनुसार शस्त्र संख्या कितनी है? अ.सू.26.1
#49. रोगाः सर्वेऽपि जायन्ते ….1 अ.सू.4.21
#50. जीवनीय पंचमूल में… द्रव्य नहीं है अ. सू. 6.170
#51. सभी द्रव्यों का अधिष्ठान क्या है ? अ.सू. 9.1
#52. नासार्श में क्षार लेपन … मात्रा तक करते है? अ.सू. 30.30
#53. बहुगुण’ ….. का गुण है।
#54. वाग्भट नुसार स्वेदन के कितने प्रकार है? अ.सू. 17.1
#55. मृदुकोष्ट व्यक्ति को स्नेहपान… दिन करना चाहिए। अ.सू.
#56. तक्र की दोषघ्नता क्या है? अ.सू. 5.33
#57. ‘सारकिट्टी पृथक्’ यह दोष का कर्म है। अ.सू.10.11
#58. उद्धर्तन से …. दोष का विनाश होता है। अ.सू.2.15
#59. वाग्भट नुसार मांस वर्ग कितने है? अ.सू.6.54
#60. उत्तरायण में वसंत ऋतु में इस का अधिक्य होता है।
#61. वाग्भट नुसार शारीरिक पापकर्म कितने है? अ.सू. 2.21
#62. विभक्तघनगात्रत्व’ यह ….. के लाभ है? अ.सू.2.10
#63. ब्रीहीधान्यों के दो प्रकारों में से श्रेष्ठ प्रकार ….. है।
#64. ‘सर्वमद्यगुणाधिक’ यह कौनसे मद्य का वैशिष्ट्य है? अ.सू.5.70
#65. उद्गारशोधन’ कौनसे लवण का गुण है ? अ.सू. 6.145
#66. सवर्ण कठिण शोफ यह व्रणशोफ की का लक्षण है? अ.सू. 29.2..
#67. वाग्भट नुसार गण्डूष प्रकार कितने है? अ.सू. 22.1
#68. शब्दासहिष्णुता …. धातुक्षय का लक्षण है। अ.सू. 11.16
#69. माहेन्द्रज जल सेवन से. . विकार उत्पन्न होते है। अ.सू. 5.11
#70. विष्टब्धाजीर्ण का चिकित्सासूत्र क्या है ? अ.सू. 8.27.
#71. भोजनपूर्व जलपान …….. उत्पन्न करता है।
#72. आयुर्वेदावतरण नुसार आयुर्वेद का ज्ञान अश्विनीकुमार से लिया।
#73. पथ्यापथ्य का मिश्र सेवन कहलाता है। अ.सू. 8.33
#74. मत्स्य मांस विशेषतः … दोष प्रकोपक होते है ? अ.सू.6.67
#75. काठिन्य कौनसे दोष का कर्म है? अ.सू. 12.53
#76. कवल गण्डुष का प्रयोग ना करे।
#77. ‘सन्धुक्षयति चानलम्’ यह.. कृतान्न के गुण है? अ. सू. 6.27
#78. वाग्भट नुसार शाकवर्ग में शाक लघु होती है। अ.सू.6.114
#79. मधुर अम्ल लवण रस प्रधान आहार का सेवन कौनसी ऋतु में पथ्य है? अ.सू.2.8
#80. निम्न में से कौनसे द्रव्य का रसायन विधी के अतिरिक्त सतत सेवन नहीं करना चाहिए ? अ.सू.6.163
#81. वर्षा ऋतु में….. अपथ्य है। अ.सू.3.48
#82. लेखनार्थ कोनसी अंजन शलाका उपयुक्त है? अ.सू. 23.13
#83. चक्षु को विशेषतः दोषों का भय रहता है? अ.सू. 2.5
#84. तण्डुलीय शाक के गुणकर्म… है। अ.सू.6.83
#85. नस्य मात्रा के लिए इस अंगुली के दो पर्व : डुबाकर गिरनेवाला बिंदू प्रमाण है।
#86. कफपित्तज विकारों में … ऋतुचर्या के समान बिहार करना चाहिए। अ.सू.12.14
#87. शस्त्रादिसाधन …. संकरे व ततो गदः।
#88. खण्ड से ज्यादा गुणात्मक कल्पना है।
#89. गुरु त्रिदोषजननं नवं जीर्णमतोऽन्यथा …… संबंधी वर्णन है।
#90. मधु ……. रसात्मक होता है।
#91. अतिमूत्रल यह कौनसे द्रव्य के गुणधर्म है ? अ.सू. 6.89
#92. राजयक्ष्मा कौनसे मार्ग का व्याधि है ? अ.सू. 12.48
#93. ……. दुग्ध शोष, ज्वर, रक्तपित्त नाशक है।
#94. रोगी परीक्षण में इसका समावेश होता है।
#95. यह उद्वर्तन का गुण है।
#96. ‘नासानाभिगलांश्चरेत’ यहाँ कौनसा दोष विचरण करता है ? अ. सू. 12.5
#97. नस्य पश्चात् कौनसा उपक्रम करते है? अ.सू.20.22
#98. वाग्भट नुसार लंघन के कितने भेद है ? अ.सू. 14.4
#99. नस्य के प्रथम 5 काल में नस्य लेने से होती है।
#100. भट्टातक का …. अंग असिम होता है अ. सू. 6.134
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