पर्यायरत्नमाला
READ eBOOK
पर्यायरत्नमाला – संक्षिप्त विवरण (माधवकरकृत)
नाम – पर्यायरत्नमाला
रचयिता – सद्वैद्य श्री माधवकर
काल – लगभग 8वीं–9वीं शताब्दी ईस्वी
प्रकार – संस्कृत पर्याय-संग्रह (Synonym Lexicon)
उद्देश्य – विभिन्न वस्तुओं, वनस्पतियों, औषधियों, देवताओं, प्राकृतिक तत्वों, और अमूर्त अवधारणाओं के लिए समानार्थक शब्दों का संग्रह, ताकि काव्य, शास्त्र और चिकित्सा – सभी में भाषा का सौंदर्य और सटीकता बनी रहे।
संरचना
-
विषयवार वर्गीकरण — देवता, प्राकृतिक तत्व, वनस्पति, औषध, जीव-जंतु, स्थान, अमूर्त अवधारणाएँ
-
प्रत्येक प्रविष्टि में एक मुख्य शब्द और उसके कई पर्याय
-
श्लोकों में रचना, जिससे स्मरण सरल हो
विशेषताएँ
-
स्मरणीय पद्यरूप
-
शास्त्रीय और क्षेत्रीय दोनों प्रकार के पर्याय
-
काव्योपयोगी और चिकित्सोपयोगी शब्दसंपदा का समावेश