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अष्टाङ्गनिघण्टु

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अष्टाङ्गनिघण्टु – परिचय एवं विवरण


1. सामान्य परिचय

नाम – अष्टाङ्गनिघण्टु
प्रकार – संस्कृत औषध-निघण्टु (आयुर्वेदिक औषध-शब्दकोश)
अर्थ –

  • अष्टाङ्ग = आयुर्वेद के आठ विभाग

  • निघण्टु = औषधियों का संग्रह, जिसमें नाम, पर्याय, गुण, रस, वीर्य, विपाक आदि का वर्णन हो

  • अष्टाङ्गनिघण्टु = ऐसा औषध-निघण्टु जो आयुर्वेद के सभी आठ अंगों में प्रयुक्त द्रव्यों का व्यवस्थित विवरण देता हो।


2. रचनाकाल एवं रचयिता

  • रचनाकाल – मध्यकालीन आयुर्वेदिक साहित्य का काल

  • रचयिता – विभिन्न पांडुलिपियों में अलग-अलग नाम मिलते हैं, परंतु निश्चित रूप से यह आयुर्वेदाचार्यों द्वारा रचित औषध-संहिता है।

  • इसका उद्देश्य चिकित्सकों और विद्यार्थियों को औषध-द्रव्यों की संपूर्ण सूची उपलब्ध कराना है, जो कायचिकित्सा, शल्य, शालाक्य, कौमारभृत्य, अगद, भूतविद्या, रसायन और वाजीकरण – इन सभी में प्रयुक्त होते हैं।


3. संरचना एवं विषयवस्तु

अष्टाङ्गनिघण्टु में औषध-द्रव्यों का वर्गीकरण प्रायः गण (groups) में किया गया है, जैसा कि अन्य पारंपरिक निघण्टुओं में होता है। संभावित संरचना –

भाग 1 – वनस्पति-औषधियाँ (ओषधिवर्ग)

  • वृक्ष, लता, औषधि, पुष्प, फल, बीज, मूल, काण्ड, पर्ण

  • गुण: रस, गुण, वीर्य, विपाक, प्रभाव

  • चिकित्सा-उपयोग: कुष्ठ, ज्वर, श्वास, अजीर्ण, विष आदि

भाग 2 – खनिज एवं धातु (धातुवर्ग)

  • सुवर्ण, रजत, ताम्र, लोह, अभ्रक, शिलाजतु

  • शोधन एवं मारण विधि

  • चिकित्सोपयोग

भाग 3 – पशु-उत्पत्ति द्रव्य (जीववर्ग)

  • दुग्ध, मधु, मक्षिका, गोमूत्र, मांस, अण्ड, शंख, मोती

  • औषधीय गुण एवं प्रयोग


4. विशेषताएँ

  • वर्गीकरण पद्धति – औषधियों को उनके स्रोत, गुण और प्रयोग के आधार पर समूहों में बांटा गया है।

  • पर्याय-सूची – प्रत्येक औषधि के अनेक संस्कृत नाम (पर्याय) दिये गये हैं, जिससे क्षेत्रीय पहचान आसान हो।

  • गुण-निर्देश – रस, गुण, वीर्य, विपाक और विशेष प्रभाव (प्रभाव) का स्पष्ट उल्लेख।

  • आयुर्वेद के सभी अंगों में उपयोग – अष्टाङ्ग का समावेश इसे विशिष्ट बनाता है।


5. शैक्षिक एवं चिकित्सकीय महत्व

क्षेत्र महत्व
आयुर्वेद शिक्षा विद्यार्थियों के लिए औषधीय ज्ञान का आधार
चिकित्सा रोगानुसार द्रव्य चयन में सहायक
अनुसंधान औषध-विज्ञान, द्रव्यगुण और फार्माकोलॉजी में संदर्भ
संस्कृति प्राचीन भारत की औषध-परंपरा का संरक्षण

6. आधुनिक संदर्भ

अष्टाङ्गनिघण्टु आज भी आयुर्वेदिक महाविद्यालयों में द्रव्यगुण विज्ञान के अध्ययन हेतु एक सहायक स्रोत है। इसे आधुनिक फार्माकोलॉजिकल दृष्टिकोण के साथ पुनः संकलित किया जा सकता है, जिसमें –

  • लैटिन बॉटनिकल नाम

  • भौगोलिक वितरण

  • रासायनिक संघटक

  • आधुनिक चिकित्सा-संबंधी अध्ययन

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