धन्वन्तरिनिघण्टु
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धन्वन्तरि निघण्टु – परिचय एवं विवरण
1. सामान्य परिचय
नाम – धन्वन्तरि निघण्टु (Dhanvantari Nighantu)
प्रकार – आयुर्वेदिक औषध-निघण्टु (Materia Medica)
भाषा – संस्कृत
अर्थ –
- धन्वन्तरि = आयुर्वेद के देवता एवं चिकित्सक-आचार्य
- निघण्टु = औषध-द्रव्यों का संग्रह
- धन्वन्तरि निघण्टु = धन्वन्तरि परंपरा से संबंधित औषधीय द्रव्यों का संकलन।
2. रचयिता एवं रचनाकाल
- रचयिता – परंपरागत रूप से इसे भगवान धन्वन्तरि या उनके अनुयायियों द्वारा रचित माना जाता है।
- काल – प्रारंभिक निघण्टु-साहित्य में से एक, सम्भवतः 10वीं–12वीं शताब्दी ईस्वी के बीच संकलित।
- यह सर्वप्रथम व्यवस्थित आयुर्वेदिक निघण्टुओं में गिना जाता है।
3. उद्देश्य
- औषधीय द्रव्यों के नाम, पर्याय, स्वरूप, गुणधर्म, रस, वीर्य, विपाक और विशेष प्रभाव को व्यवस्थित करना।
- आयुर्वेदिक चिकित्सकों के लिए एक मानक संदर्भ ग्रंथ प्रदान करना।
- द्रव्यगुण विज्ञान के अध्ययन के लिए आधारभूत सामग्री उपलब्ध कराना।
4. संरचना एवं विषयवस्तु
धन्वन्तरि निघण्टु को प्रायः 7 मुख्य वर्गों (गण) में विभाजित किया गया है –
- गन्धवर्ग – सुगंधित द्रव्य
- पुष्पवर्ग – पुष्प-आधारित औषधियाँ
- फलवर्ग – फलजन्य द्रव्य
- पत्रवर्ग – पत्तियों से प्राप्त औषधियाँ
- मूलवर्ग – भूमिगत भाग (कन्द, मूल)
- काण्डवर्ग – तना या डंठल-आधारित औषधियाँ
- विषवर्ग – विषैले एवं अर्धविषैले द्रव्य
प्रत्येक द्रव्य के अंतर्गत –
- पर्याय (Synonyms)
- लक्षण (Identification)
- रस, गुण, वीर्य, विपाक
- विशेष प्रभाव (Prabhāva)
- चिकित्सकीय उपयोग
5. विशेषताएँ
- प्राचीनता – निघण्टु-साहित्य की सबसे पुरानी और आधारभूत कड़ी।
- सुगंध एवं वनस्पति-केन्द्रित दृष्टिकोण – विशेष रूप से गंधद्रव्य और पुष्पों का विस्तृत विवरण।
- सरल भाषा – चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए स्मरणीय शैली।
- पर्यायों की समृद्ध सूची – क्षेत्रीय और शास्त्रीय नामों का समावेश।
6. शैक्षिक एवं चिकित्सकीय महत्व
| क्षेत्र | महत्व |
|---|---|
| आयुर्वेद शिक्षा | द्रव्यगुण विज्ञान का प्रारंभिक और आधारभूत स्रोत |
| चिकित्सा | रोगानुसार औषधि चयन के लिए व्यावहारिक संदर्भ |
| अनुसंधान | प्राचीन औषध-विज्ञान और वनस्पति विज्ञान का अध्ययन |
| सांस्कृतिक इतिहास | प्राचीन भारत की वनस्पति-परंपरा और औषध ज्ञान का संरक्षण |
7. आधुनिक संदर्भ
धन्वन्तरि निघण्टु का अध्ययन आज भी द्रव्यगुण विज्ञान विषय के प्रथम चरण में कराया जाता है। आधुनिक संस्करणों में –
- बॉटनिकल नाम
- भौगोलिक वितरण
- रासायनिक संरचना
- आधुनिक क्लिनिकल स्टडीज़ जोड़ी जा सकती हैं, जिससे यह प्राचीन ज्ञान आधुनिक चिकित्सा से जुड़ सके।
