द्रव्यगुणसङ्ग्रह
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द्रव्यगुणसंग्रह (आचार्य चक्रपाणिदत्तकृत)
1. सामान्य परिचय
- नाम – द्रव्यगुणसंग्रह (Dravyaguṇa Saṅgraha)
- रचयिता – आचार्य चक्रपाणिदत्त
- भाषा – संस्कृत
- प्रकार – आयुर्वेदिक द्रव्यगुण विज्ञान का ग्रंथ
- विषय – औषधीय द्रव्यों के नाम, स्वरूप, पर्याय, गुण, रस, वीर्य, विपाक, विशेष प्रभाव और रोगानुसार उपयोग
2. आचार्य चक्रपाणिदत्त का परिचय
- काल – लगभग 11वीं शताब्दी ईस्वी
- स्थान – बंगाल क्षेत्र
- प्रमुख कृतियाँ –
- चिकित्सासंग्रह (चरक-चिकित्सा पर टिप्पणी)
- भानुमती (चरक संहिता पर टीका)
- द्रव्यगुणसंग्रह – स्वतंत्र निघण्टु
- चक्रपाणिदत्त को द्रव्यगुण, चिकित्सा और शास्त्रीय टीका-लेखन का अद्वितीय आचार्य माना जाता है।
3. रचनाकाल एवं उद्देश्य
- रचनाकाल – 11वीं शताब्दी ईस्वी
- उद्देश्य –
- औषध-द्रव्यों का व्यवस्थित संकलन और वर्गीकरण
- चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए एक मानक reference manual प्रदान करना
- क्षेत्रीय और लोक-नामों के साथ शास्त्रीय विवरण को जोड़ना
4. संरचना एवं विषयवस्तु
ग्रंथ में औषधियों को विषयवार गणों में विभाजित किया गया है, प्रत्येक द्रव्य के लिए निम्न विवरण मिलता है –
- नाम और पर्याय
- स्वरूप-लक्षण (Morphology)
- रस, गुण, वीर्य, विपाक
- विशेष प्रभाव (Prabhāva)
- चिकित्सकीय उपयोग (रोगानुसार)
मुख्य वर्ग (संभावित)
- वनस्पति वर्ग – वृक्ष, लता, कन्द, मूल, फल, पुष्प
- खनिज वर्ग – धातु, रत्न, खनिज
- पशु-उत्पत्ति वर्ग – दुग्ध, मधु, घृत, मांस आदि
- विष वर्ग – विषैले द्रव्य और उनके विषहर प्रयोग
5. विशेषताएँ
- संग्रहात्मक शैली – विभिन्न ग्रंथों से संकलित और व्यवस्थित प्रस्तुति
- संक्षिप्त एवं स्पष्ट भाषा – स्मरण और प्रयोग में सरल
- पर्यायों की प्रचुरता – द्रव्यों के स्थानीय और शास्त्रीय दोनों नाम
- क्लिनिकल दृष्टिकोण – रोगानुसार औषधि उपयोग की स्पष्टता
6. महत्व
| क्षेत्र | महत्व |
|---|---|
| आयुर्वेद शिक्षा | द्रव्यगुण विज्ञान के लिए मानक पाठ्यसामग्री |
| चिकित्सा | रोगानुसार द्रव्य चयन और योग निर्माण |
| अनुसंधान | मध्यकालीन औषध-ज्ञान का स्रोत |
| इतिहास | चक्रपाणिदत्त की औषध-विज्ञान परंपरा का दर्पण |
