अमरकोश
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अमरकोश – परिचय एवं विवरण
1. सामान्य परिचय
पूरा नाम – अमरकोश अथवा नामलिङ्गानुशासनम्
रचयिता – आचार्य अमरसिंह
भाषा – संस्कृत
प्रकार – अभिधान (संस्कृत निघण्टु / शब्दकोश)
विषय – संस्कृत भाषा के शब्दों का पर्याय, लिङ्ग (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) और विषयानुसार वर्गीकरण।
अमरकोश को संस्कृत निघण्टु-साहित्य का सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन ग्रंथ माना जाता है। यह केवल एक शब्द-संग्रह नहीं, बल्कि काव्य, व्याकरण और शास्त्र-अध्ययन के लिए एक अनिवार्य सहायक है।
2. रचनाकाल एवं पृष्ठभूमि
रचनाकाल: लगभग 4वीं से 6वीं शताब्दी ई. के बीच
आचार्य अमरसिंह को प्राचीन काल के नव-रत्नों में गिना जाता है (किंवदंती के अनुसार सम्राट विक्रमादित्य के दरबार में)।
अमरकोश की रचना पद्य (श्लोक) रूप में की गई है, ताकि विद्यार्थी इसे आसानी से कंठस्थ कर सकें।
3. संरचना (विभाग एवं काण्ड)
अमरकोश को तीन काण्डों में विभाजित किया गया है –
स्वर्गादिकाण्ड –
देवताओं, स्वर्ग, आकाश, समय, दिशाओं, नक्षत्रों, ग्रहों, ऋतुओं, आकाशीय घटनाओं आदि से संबंधित शब्द।
भूम्यादिकाण्ड –
पृथ्वी, पर्वत, वनस्पति, जीव-जंतु, मानव-शरीर, संबंध, सामाजिक वर्ग, व्यवसाय, इन्द्रिय, भाव आदि के शब्द।
सम्वादिकाण्ड –
क्रिया, धर्म-अधर्म, युद्ध, संगीत, नृत्य, भावना, मानसिक अवस्थाएँ, क्रिया विशेषण आदि।
4. विशेषताएँ
पद्य-रूप में रचना – स्मरण में सरलता
पर्याय एवं लिङ्ग-निर्देश – हर शब्द का लिंग और कई पर्याय दिये गये हैं
विषय-वार क्रम – शब्दों का वर्गीकरण विषय अनुसार, जिससे संदर्भ खोजना आसान हो
काव्योपयोगी – कवियों के लिए भाषा की संपन्नता प्रदान करने वाला
5. शैक्षिक एवं सांस्कृतिक महत्व
| क्षेत्र | महत्व |
|---|---|
| संस्कृत शिक्षा | शब्द भंडार और पर्यायवाची ज्ञान का स्रोत |
| काव्य रचना | समृद्ध और शुद्ध शब्द चयन में सहायक |
| व्याकरण अध्ययन | लिंग एवं प्रयोग की शुद्धता |
| इतिहास एवं संस्कृति | प्राचीन भारतीय समाज और प्रकृति संबंधी शब्द-संपदा का ज्ञान |
6. प्रभाव एवं परंपरा
अमरकोश के कई भाष्य (टीकाएँ) रचित हुए, जैसे – क्षीरस्वामि-टीका, मल्लिनाथ-टीका, भानुजी दीक्षित की व्याख्या।
यह आज भी संस्कृत पंडित, विद्यार्थी और शोधकर्ताओं के लिए अनिवार्य संदर्भ है।
भारत के विभिन्न भाषाओं में इसके अनुवाद और अनुकूलन उपलब्ध हैं।
