अभिधानमञ्जरी
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अभिधानमञ्जरी
1) मूल परिचय
पूरा नाम: अभिधानमञ्जरी
ग्रन्थकार: भिषगार्य (Bhiṣagārya)
ग्रन्थ-स्वरूप: आयुर्वेदिक पर्याय-कोश/निघण्टु — औषधीय द्रव्यों एवं संबंधित द्रव्यों के नाम-पर्याय का क्रमबद्ध संग्रह
ग्रन्थ-उद्देश्य: चिकित्सकों और विद्यार्थियों को द्रव्यों के समानार्थक/पर्याय त्वरित रूप से उपलब्ध कराना; विभिन्न ग्रन्थों—विशेषतः अष्टाङ्गहृदय—में वर्णित द्रव्यों के नामों को एक जगह संकलित करना
रचनाकाल: पारम्परिक सूचियों और मुद्रित संस्करणों में मध्यकालीन आयुर्वेदिक निघण्टु के रूप में वर्णित (सटीक शताब्दी निर्दिष्ट नहीं)
2) ग्रन्थ की पहचान और परिधि
यह “अभिधान” को मुख्य धुरी बनाकर रचा गया पर्याय-संग्रह है; केन्द्रबिन्दु औषध-नाम और उपयोग-अंश (फल/मूल/बीज/पर्ण/काण्ड/वल्कल आदि) से संबद्ध नामावली है।
ग्रन्थकार के वक्तव्य/परम्परा के अनुसार, सूचीकृत नाम अष्टाङ्गहृदय एवं आयुर्वेद के प्रचलित साहित्य में प्रयुक्त द्रव्यों के पर्याय हैं।
अभिधान-परंपरा के अन्य कोशों (जैसे अभिधानरत्नमाला, अभिधानचिन्तामणि) से भिन्न, अभिधानमञ्जरी का उपयोग-क्षेत्र औषध-नामावली पर केंद्रित है; यह काव्य-कोश नहीं, बल्कि चिकित्सकीय पर्याय-कोश है।
3) सामग्री और प्रस्तुति (Entry Design)
सामान्यतः प्रत्येक प्रविष्टि में—
मूल द्रव्य का नाम
पर्याय/समानार्थक नाम (शास्त्रीय तथा कभी-कभी जनपदीय/लोक-प्रचलित)
उपयोग-अंश का संकेत (जहाँ आवश्यक)
संक्षिप्त टिप्पणी (यदि किसी स्थान पर भेद-परिभाषा अपेक्षित हो)
नोट: यह ग्रन्थ पर्याय-केन्द्रित है; द्रव्यगुण (रस-गुण-वीर्य-विपाक) या विस्तृत चिकित्सोपयोग यहाँ का मुख्य विषय नहीं हैं—उनके लिए भावप्रकाशनिघण्टु, धन्वन्तरि निघण्टु, राजनिघण्टु आदि का सहपठन अपेक्षित है।
4) शिक्षण और व्यावहारिक उपयोग
बी.ए.एम.एस./एम.डी. (द्रव्यगुण) में: औषध-नामों की बहुभाषी/बहुनाम समझ विकसित करने हेतु उपयोगी; विशेषकर औषध-समीकरण (drug mapping) और प्रतिनिधि-द्रव्य (substitution) के संदर्भ में।
क्लिनिकल/फार्मेसी: कच्चे माल, बाजारू नाम, एवं शास्त्रीय नाम के सम्बन्ध-सत्यापन में त्वरित सहायक।
अनुसंधान/संपादन: पाण्डुलिपि-पठन में नाम-भिन्नता (variant readings) सुलझाने व क्रॉस-रेफरेंस बनाने के लिए उपादेय।
5) अन्य अभिधान/निघण्टुओं से भिन्नताएँ
| पहलू | अभिधानमञ्जरी (भिषगार्य) | काव्य-कोश (जैसे अमरकोश/अभिधानरत्नमाला) | औषध-निघण्टु (जैसे भावप्रकाश/धन्वन्तरि/राज) |
|---|---|---|---|
| मूल ध्येय | औषध-पर्याय | भाषा/काव्य-पर्याय | औषध का गुण-कर्म-उपयोग |
| प्रविष्टि का फोकस | नाम/उपनाम/उपयोग-अंश | देव/भाव/प्रकृति/सांस्कृतिक पर्याय | रस-गुण-वीर्य-विपाक/कर्म/पाक-प्रक्रिया |
| उपयोगकर्ता | वैद्य/विद्यार्थी/औषध-अनुसंधानकर्ता | कवि/भाषाशास्त्री | चिकित्सक/शोधार्थी/फार्मासिस्ट |
6) LMS-उपयोग हेतु त्वरित ढाँचा
A. अध्यापन-लक्ष्य
50–60 प्रमुख द्रव्यों के मूल नाम + शीर्ष 6–8 पर्याय कंठस्थ
बाजारू/देशज नामों का शास्त्रीय नाम से मिलान (Mapping)
समान नाम वाले भिन्न द्रव्यों की भेद-पहचान (homonym resolution)
B. अभ्यास-प्रारूप
Flash Cards: एक पृष्ठ पर “द्रव्य-नाम”, पीछे “पर्याय-सूची”
Name-Mapping Table: “शास्त्रीय नाम — व्यापारिक नाम — जनपदीय नाम — संदर्भ ग्रन्थ”
Spot the Confusion: एक-जैसे व्यापारिक नामों के बहुविध शास्त्रीय युग्मों की पहचान
7) समापन सार
ग्रन्थ: अभिधानमञ्जरी
रचयिता: भिषगार्य
केन्द्र: औषध-नामों के पर्याय
भूमिका: अष्टाङ्गहृदय आदि में प्रयुक्त द्रव्यों की नामावली को एकत्र कर नाम-सम्बन्धी रिक्तियों को भरना
शैक्षिक मूल्य: द्रव्य-पहचान, नाम-भ्रम की निवृत्ति, और प्रिस्क्रिप्शन/फॉर्म्युलेशन-कार्य में मानकीकृत नाम-प्रयोग को बढ़ावा
