Work on progress for a better learning experience!

Dear learners,
To improve your learning experience, we have started the process of Ayurved Bharati website and mobile application renovation. Although we are taking utmost care to avoid any issues, but there might be a chance that you may face some technical issues for a while. In case you find any unusual app/ website behaviour or unable to find any of your enrolled course/ lesson, please inform us. Your cooperation is highly appreciated.

Padarth Vigyan MCQs Set-1

 

#1. चेष्टा प्रमाण का समावेश इस प्रमाण में होता है ।

#2. . पृथ्वी में गुण संख्या है।

#3. निष्क्रमण, प्रवेशन ये इस महाभूत के गुण है ।

#4. चरकोक्त सामान्य प्रकार है ।

#5. जहां हेतु रहता है वहां साध्य होता है । यह अनुमान है।

#6. अयथार्थ अनुभव के प्रकार है ।

#7. विशेषस्तु पृथकत्वकृत् । यह निम्न में से है।

#8. अरुणदत्त के अनुसार सप्तविध कल्पना के आश्रय है ।

#9. पुष्पफलवंतो वृक्षाः । यह सूत्र निम्न में से इसका है।

#10. उपमान के प्रकार है ।

#11. हिरोक्लिटस् के अनुसार जगत् का मुलतत्व है ।

#12. .. सा या विक्रियमाण कार्यत्वम् अपद्यते ।

#13. एकदेशापकर्षन यथा’ इस का संबंध इस तंत्रयुक्तिसे है ।

#14. . प्राच्यादि व्यवहार हेतु …. ।

#15. अनुवृत्ति प्रत्यय हेतु ……. । (तर्कभाषा)

#16. शुण्ठी, पद के किस प्रकार में आयेगा।

#17. दशपदार्थशास्त्रनामक ग्रंथ इस दर्शन से संबंधित है ।

#18. तर्क के भेद है।

#19. मूर्त गुण कितने है ?

#20. तर्कसंग्रह ग्रंथ के रचयिता है।

#21. जरणशक्ति से अग्नि का परीक्षण इस प्रमाण द्वारा किया जाता है।

#22. चक्रपाणि ने इन गुणों को चिकित्सोपयोगी गुण कहा है।

#23. सुश्रुतोक्त तंत्रयुक्तियाँ कितनी है ?

#24. अपरिमिताश्चपदार्थाः। यह सूत्र इस आचार्य ने कहा है 1?

#25. सुखादि उपलब्धि साधनम् ।

#26. वाक्यदोष कितने है ?

#27. नैयायिक प्रमाणविचार का ने स्वीकार किया है ।

#28. वादमार्ग ज्ञानार्थ पद (शास्त्रार्थ उपयोगी पद) है ।

#29. तमोबहुला….।

#30. लोकपुरुष साम्य भाव है ।

#31. निम्न से यह पदार्थ का सामान्य लक्षण है ।

#32. इस का समावेश सप्तदश ताच्छील्यादि प्रकारों में नहीं होता।

#33. अंतःकरण अर्थात् ……….. ।

#34. वाग्भट ने तम का रस माना है।

#35. जलकर्षण बीतर्जुसंयोगात् सस्यसंभवः । यह इस प्रमाण का उदाहरण है ।

#36. निम्न में से यह तंत्रयुक्ति सुश्रुतोक्त नहीं है ।

#37. मन के प्रशस्तपादोक्त गुण कितने है।

#38. …-इस अवस्था में चित्त रजोगुण से प्रभावित होता है ।

#39. अतीतादि व्यवहार हेतुः….. ।

#40. प्रभाकर के अनुसार प्रमाण कितने है ?

#41. भट्टारहरिश्चन्द्र ने सामान्य के भेद माने हैं-

#42. अधर्मजन्यम् प्रतिकूलवेदनीयं…. । (प्रशस्तपाद)

#43. जाठराग्नि अर्थात् ……… ।

#44. योगदर्शन ने सांख्यदर्शन से यह तत्त्व अधिक माना है।

#45. नाभिस्थान में उत्पन्न होनेवाली वाणी हे ।

#46. इस में से यह आप्तगुण नहीं है ।

#47. पूर्वमीमांसा’ दर्शन के रचयिता है ।

#48. अपि सदोषमाख्यातं मोहांशत्वात् । (चरक)

#49. प्रत्यक्ष ज्ञान के बाधक भाव या हेतु है ।

#50. कारण से कार्य का अनुमान करना यह अनुमान है ।

#51. यह अयथार्थ ज्ञान का प्रकार है ।

#52. पुरुष है ।

#53. आयुर्वेद के अनुसार अर्थापत्ति का समावेश इसमें होता है?

#54. यस्य द्रव्यस्य विवरणे शक्तिः स । (हेमाद्रि)

#55. ब्रह्मसूत्रों की रचना की है।

#56. कर्मनीयतीवाद इस दर्शन ने बताया है ।

#57. सार्थ गुण निम्न में से है ।

#58. निम्न में से यह दर्शन कर्मप्रधान है ।

#59. पुण्य, पाप ये जैन दर्शनोक्त ……..है।

#60. पंचावयव वाक्य का प्रयोग होता है।

#61. लिंगशरीर तत्त्वात्मक होता है ।

#62. गंध गुण के प्रकार निम्न में से हैं ।

#63. विचार्य’ इसका समावेश मान के में होता है ।

#64. आयुर्वेद में कुल कितने गुण बताये है ?

#65. पाणि’ इस कर्मेन्द्रिय का महाभूत है ।

#66. धातुवैषम्य अर्थात् 1

#67. अनेकांतवाद’ ……… दर्शन में वर्णित है।

#68. अतिवाहिक पुरुष का वर्णन …….. इस आचार्य ने किया है

#69. तर्कविद्या अर्थात् ….. ।

#70. त्रिपीटक’ ये इस दर्शन की प्रमुख ग्रंथसंपदा है ।

#71. निम्न में यह शास्त्रज्ञान का उपाय नहीं है ।

#72. वेदान्त की प्रस्थानत्रयी में इसका समावेश नहीं है ।

#73. अतिन्द्रिय ग्राह्य गुण है ।

#74. इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष के प्रकार है ।

#75. त्रिविध अंतःकरण में इसका समावेश नहीं होता ।

#76. व्याप्ति विशिष्ट पक्षधर्मता ज्ञानं …………. ।

#77. क्रियायोग में निम्न में से इसका समावेश होता है ।

#78. यथार्थ अनुभवः ।

#79. न्यायदर्शन के अनुसार हेत्वाभास के प्रकार है ।

#80. शक्तिग्रह कितने है ?

#81. मन के गुण कितने है?

#82. अणुत्वं एकत्व ये मन के है ।

#83. पद के प्रकार है ।

#84. वैशिषिक दर्शन के अनुसार आकाश का लक्षण है ।

#85. जडबाद – दर्शनसम्मत है।

#86. नाम परपक्षे दोषवचनमात्रमेव । (च.वि.)

#87. तर्कसंग्रह में परिमाण के प्रकार हैं।

#88. शास्त्रोक्त पद्धती से की गई विगृह्यसंभाषा अर्थात् |

#89. इस दर्शन ने 16 पदार्थ माने है ।

#90. षोडश विकारों में निम्न में से इसका समावेश नहीं होता। (चरक)

#91. वैशिषिक सूत्र कितने खण्डो में विभाजित है ?

#92. न्यायदर्शन में प्रमाण वर्णित है ।

#93. पदानाम् अविलम्बेन उच्चारणं । (तर्कसंग्रह)

#94. सिषाधयिषा विरहित सिद्धि का अभाव अर्थात् – -।

#95. संहतपरार्थत्वात्’ से पुरुष तत्त्व का / की स्पष्ट होता है।

#96. जैनदर्शनोक्त अजीव सृष्टी के प्रकार है ।

#97. ज्ञानाधिकरणम्

#98. क्रियाशून्यता यह इस गुण का धर्म है ।

#99. पीलुपाकबाद किसने बताया ?

#100. स्मृति के कारण है ।

Previous
Submit

Results

Leave a Comment

Shopping Basket
APP
My Account
Support
Back
×