#1. वेदांत की प्रस्थानत्रयी में … का समावेश नहीं है।
#2. अक्रियावादी दर्शन कितने है ।
#3. इंद्रियांतर संचार करना इसका लक्षण है ।
#4. सांख्य दर्शनकार हैं।
#5. तर्क के भेद है।
#6. कुमारिल के अनुसार पदार्थ कितने है ?
#7. सुख दुःख गुण है।
#8. आद्यपतनस्य असमवायी कारणं…. ।
#9. तेज महाभूत का रूप है ।
#10. समस्त विश्व को जीवन प्रदान करने वाला जल है ।
#11. जैनोक्त तत्व है ।
#12. या कलनात् सर्व भूतानां स कालः परिकीर्तितः । संदर्भ ?
#13. अंतःकरण चतुष्टय में इसका समावेश नहीं होता ।
#14. स्वप्न के प्रकार है ।
#15. इस आचार्य ने अभाव यह पदार्थ माना नहीं ।
#16. तर्कसंग्रह में परिमाण के प्रकार हैं।
#17. यह द्विन्द्रिय (चक्षु और त्वक्) ग्राह्य गुण है ।
#18. त्रिवर्ग में नहीं आता है।
#19. चरकाचार्य नुसार ‘विशेषस्तु पृथकत्वकृत्’ अर्थात् है ।
#20. ……… इसके अनुसार मन को संसार की नाभि कहा है।
#21. तैत्तिरिय उपनिषद के अनुसार पृथ्वी महाभूत की उत्पत्ति इस से हुई।
#22. अभाव के भेद है।
#23. पुण्य, पाप ये जैन दर्शनोक्त ……..है।
#24. आचार्य भेल के अनुसार तीन एषणा निम्न में से है
#25. मन के गुण कितने है?
#26. रज व तम गुणों से मुक्त व्यक्ति को कहते है ।
#27. अभाव के प्रमुख प्रकार है ।
#28. यह तंत्रयुक्ति का प्रयोजन है ।
#29. तर्कसंग्रह ग्रंथ के रचयिता है।
#30. हाथ में ध्वज लेकर है वह नेता है’ यह इस लक्षण का उदाहरण है ।
#31. वेदान्त की प्रस्थानत्रयी में इसका समावेश नहीं है ।
#32. सामान्य गुणों की संख्या है ।
#33. आदित्य इस लोकगतभाव का पुरुषगत भाव है ।
#34. ……. यह मूर्त द्रव्य नही है ।
#35. भावप्रकाश के अनुसार आकाशमहाभूत का भौतिक गुण है।
#36. आदान’ यह इस कर्मेन्द्रिय का कर्म है।
#37. न्यायदर्शनकार के अनुसार प्रमेय है ।
#38. तर्कसंग्रह के अनुसार सामान्य के प्रकार हैं ।
#39. अनुमान परिक्षा-विज्ञानं (चरक)
#40. . मध्वाचार्य ने द्रव्य बताये है ।
#41. अपि सदोषमाख्यातं मोहांशत्वात् । (चरक)
#42. आत्मगुण कितने है ?
#43. अभाव पदार्थ किसने बताया है ।
#44. गुणों से युक्त हेतु को सद्हेतु कहते है ।
#45. अययार्थ अनुभव के प्रकार है ।
#46. निष्क्रमण, प्रवेशन ये इस महाभूत के गुण है ।
#47. पृथ्वी पर स्थित जल को कहते हैं।
#48. हेतु के मुख्य प्रकार है ।
#49. वायु के प्रशस्तपादोक्त गुण है।
#50. यह विष्णुवाची पद है ।
#51. चरकाचार्य के अनुसार तंत्रयुक्तियाँ है ।
#52. तर्कसंग्रह पर अन्नभट्ट की टीका है ।
#53. कौटिलीय के अनुसार तंत्रयुक्ति है ।
#54. ‘पुनर्जन्म सिद्धि’ का वर्णन चरक संहिता के सूत्रस्थान इस अध्याय में आया है ।
#55. निम्न में से ये जैनोक्त प्रमाण है ।
#56. षडदर्शन समुच्चय के लेखक हैं।
#57. क्षालने ….. ।
#58. शारीरगुण है ।
#59. निम्न में यह शास्त्रज्ञान का उपाय नहीं है ।
#60. . हेतुसाध्ययोः अविनाभाव संबंध …।
#61. ब्रह्म सत्यं जगत् मिथ्या’ इस तत्त्वपर आधारित यह दर्शन है ।
#62. कार्यरूप तेज महारूप का परिमाण है ।
#63. देवहुतीने ग्रहण किया हुआ तत्त्वज्ञान है।
#64. दुःख कितने प्रकार का होता है । (सांख्य)
#65. लोकपुरुष साम्य भाव है ।
#66. शास्त्र की त्रिविध प्रवृत्ति में इस का समावेश नहीं है ।
#67. श्लक्ष्ण यह इस महाभुत प्रधान द्रव्य का गुण है।
#68. परिणामवाद इस दर्शन का है ।
#69. ‘वृक्ष पर पक्षी का बैठना’ यह इस संयोग प्रकार का उदा. है ।
#70. युक्ति के यौगिक और अयौगिक प्रकार ने बताये है।
#71. उत्पन्नस्य कारणे अभावः … ।
#72. गाय के जैसी वनगाय’ अर्थात् … उपमान है ।
#73. कर्तृकारणसंयोगात क्रिया’ इस प्रमाण का लक्षण है ।
#74. यत्र यत्र धूमस्तत्र तत्राग्निरिति साहचर्योनियमो । (तर्कसंग्रह)
#75. क्रियाशून्यता यह इस गुण का धर्म है ।
#76. नाम विचारितस्यार्थस्य व्यवस्थापनम् । (चक्रपाणि)
#77. वैशेषिकोक्त प्रथम पदार्थ है ।
#78. रत्नत्रय निम्न में से इस दर्शन ने बताये है।
#79. जैनदर्शनोक्त तत्त्व “संवर” के प्रकार है।
#80. प्रशस्तपाद के अनुसार आकाश महाभूत में यह गुण नहीं होता ।
#81. कणोपनिषद के अनुसार ‘मन’ यह जीवनरथ का है |
#82. सत्त्वरजो बतुलो ।
#83. पाद कर्मेन्द्रिय की उत्पत्ति इस महाभूत से हुई है ।
#84. इस अनुमान से गर्भधारणा से मैथुन का ज्ञान होता है ।
#85. परिशेष प्रमाण का उल्लेख इसमें आया है ।
#86. केवल अद्वैतवाद कौनसे आचार्य ने बताया हैं?
#87. प्रमायाः करणं प्रमाणम् । यह व्याख्या किसने बतायी है ?
#88. यत्रावयवधारा अविश्रान्तिः स परमाणुः ।
#89. अग्नि में शीतलता न होना’ यह इस अभाव का उदाहरण है ।
#90. इन गुणों को चिकित्सा उपयोगी गुण कहा जाता है ।
#91. यो अर्थः प्रमियते तत् –
#92. विश्वलक्षणा गुणाः । इस सूत्र का संदर्भ है ।
#93. वस्य द्रव्यस्थ विवरणे शक्तिः स ……
#94. ककुभ निम्न में से इसका पर्याय है ।
#95. सहेतु के प्रकार है ।
#96. एक त्रसरेणु में परमाणु होते हैं।
#97. प्रमितिविषया पदार्थाः । इस सूत्र का संदर्भ है।
#98. भट्टारहरिश्चंद्र के अनुसार सामान्य के प्रकार है ।
#99. अरुणदत्त के अनुसार तंत्रदोष व कल्पना क्रमशः है ।
#100. मनोव्याकरणात्मकम् | यह मन का लक्षण – ने बताया है।
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