#1. षट्कारणवाद कौनसे आचार्य ने बताया है ।
#2. स्वर्णादि धातु गत तेज निम्न में से है ।
#3. लौकिक कर्म के प्रकार है ।
#4. पुण्य, पाप ये जैन दर्शनोक्त ……..है।
#5. अष्टांगसंग्रह के अनुसार तंत्रयुक्ति है ।
#6. ‘उपस्थ’ की देवता है ।
#7. अनुवृत्ति प्रत्यय हेतु ……. । (तर्कभाषा)
#8. कारण भेद से शब्द के प्रकार है ।
#9. जैनदर्शनोक्त अजीव सृष्टी के प्रकार है ।
#10. गंध गुण के प्रकार कितने है ।
#11. पृथ्वी महाभूत के प्रशस्तपादोक्त गुण है ।
#12. शास्त्र की त्रिविध प्रवृत्ति में इस का समावेश नहीं है ।
#13. इस आचार्य ने अभाव यह पदार्थ माना नहीं ।
#14. स्वभावोपरमवाद’ इस आचार्य ने बताया है ।
#15. शब्द गुण है क्योंकि नेत्र से दिखाई देता है’ यह – असिद्ध हेत्वाभास है ।
#16. सामान्य गुण कितने है?
#17. धर्मजन्म अनुकूलवेदनीयं गुणः सुखम् । इस सूत्र को किसने कहा है ?
#18. अतीतादि व्यवहार हेतुः….. ।
#19. इंद्रिय द्रव्य है।
#20. विचार्य’ इसका समावेश मान के में होता है ।
#21. . पुरुषपंचक निम्न में से पुराणोक्त है।
#22. निम्न में से नास्तिक दर्शन नहीं है।
#23. प्रशस्तपाद के अनुसार आकाश महाभूत में यह गुण नहीं होता ।
#24. प्रमायाः करणं प्रमाणम् । यह व्याख्या किसने बतायी है ?
#25. आन्विक्षिकी विद्या के प्रवर्तक है ।
#26. पतंजली के अनुसार शक्ति आश्रम इस पर निर्भर होता है ।
#27. मिथ्य आहारविहार रोग का ……… कारण है।
#28. पदानाम् अविलम्बेन उच्चारणं । (तर्कसंग्रह)
#29. अंतःकरण चतुष्टय में इसका समावेश नहीं होता ।
#30. वाक्यार्थ ज्ञान हेतु कितने है ? (मुक्तावलीकार)
#31. अग्नि का नैमित्तिक गुण है।
#32. द्वैपायन इस दर्शन के कर्ता है ।
#33. उभयगुण (मूर्त और अमूर्त) कितने है ?
#34. पीलुपाकबाद किसने बताया ?
#35. अष्टाध्यायी के लेखक हैं।
#36. त्रिविध अंतःकरण में इसका समावेश नहीं होता ।
#37. जाठराग्नि अर्थात् ……… ।
#38. तैत्तिरिय उपनिषद के अनुसार पृथ्वी महाभूत की उत्पत्ति इस से हुई।
#39. कार्यरूप तेज महारूप का परिमाण है ।
#40. तर्कसंग्रह पर अन्नभट्ट की टीका है ।
#41. औलूक्य दर्शन कहलाता है।
#42. देह की कर्मशक्ति को बांधनेवाला गुण कौनसा है ?
#43. भट्टार हरिश्चंद्र के अनुसार अर्थाश्रय है ।
#44. सिद्धांत कितने है ?
#45. अनन्यथासिद्ध नियतपूर्ववृत्तित्वं । (तर्कसंग्रह) —
#46. सार्थ गुण निम्न में से है ।
#47. कारणभेद से संभाषा के प्रकार है ।
#48. पंचतन्मात्राओंकी उत्पत्ति इस अहंकार से हुई है ।
#49. विशिष्ट अद्वैतवाद के प्रणेता है ।
#50. प्रसिद्ध साधर्म्यात साध्य साधन — । (न्यायदर्शन)
#51. धातुवैषम्य अर्थात् 1
#52. उर्ध्वगति इस तेज की होती है ।
#53. “हरीतकी बीज से हरीतकी की उत्पत्ति” यह इसका उदाहरण है।
#54. तर्कसंग्रह के अनुसार कारण के प्रकार है ।
#55. सादृश्यधर्म विशिष्ट यह इस प्रमाण का प्रकार है ।
#56. सत्त्वरजो बतुलो ।
#57. यह द्विन्द्रिय (चक्षु और त्वक्) ग्राह्य गुण है ।
#58. दर्शन के प्रमुख भेद कितने हैं ?
#59. परिणामवाद इस दर्शन का है ।
#60. विष्णुपुराण के अनुसार आत्मा के प्रकार है ।
#61. यह मूर्त द्रव्य नहीं है ।
#62. हाथ में ध्वज लेकर है वह नेता है’ यह इस लक्षण का उदाहरण है ।
#63. वात्स्यायनोक्त परार्थ अनुमान है ।
#64. ……… इसके अनुसार मन को संसार की नाभि कहा है।
#65. संस्कार का प्रकार नहीं है।
#66. अतिवाहिक पुरुष का वर्णन …….. इस आचार्य ने किया है
#67. शास्त्रोक्त पद्धती से की गई विगृह्यसंभाषा अर्थात् |
#68. वेदान्त की प्रस्थानत्रयी में इसका समावेश नहीं है ।
#69. निम्न में से पंचमहाभूत का समावेश है ।
#70. चेष्टा प्रमाण का समावेश इस प्रमाण में होता है ।
#71. अनुमान प्रमाण में इस प्रमाण का समावेश नहीं होता ।
#72. निम्न पर्यायों में से अतिन्द्रियग्राह्य गुण है ।
#73. किसी कारण बिना आकस्मिक घटना का घटजाना अर्थात् ।
#74. काव्यशास्त्र सम्मत प्रमाणों की संख्या है।
#75. का रूप भास्वर शुक्ल है ।
#76. निम्न में से यह पदार्थ का विशेष लक्षण है ।
#77. अथातो धर्मजिज्ञासा’ यह कृत सूत्र है ।
#78. निम्न में से ये स्वप्न प्रकार सफल होते है ।
#79. ब्द की शब्दत्व यह जाती श्रोता को इस सन्निकर्ष से मझती है।
#80. पुष्पफलवंतो वृक्षाः । यह सूत्र निम्न में से इसका है।
#81. आदित्य इस लोकगतभाव का पुरुषगत भाव है ।
#82. न्यायदर्शन में प्रमाण वर्णित है ।
#83. इस अनुमान से गर्भधारणा से मैथुन का ज्ञान होता है ।
#84. नाम परपक्षे दोषवचनमात्रमेव । (च.वि.)
#85. निम्न में से यह मन का प्रधान कर्म है ।
#86. विश्वलक्षणा गुणाः । इस सूत्र का संदर्भ है ।
#87. ज्ञान विज्ञान चचन प्रतिवचन शक्ति संपन्न है।
#88. अरुणदत्त के अनुसार तंत्रदोष व कल्पना क्रमशः है ।
#89. एकं द्रव्यं अगुणं संयोग विभागेषु अनपेक्ष कारणम् इति कर्मलक्षणम् । इस सूत्र का संदर्भ क्या है ?
#90. पराजय प्राप्ति स्थान अर्थात्……..।
#91. ‘ऐतिह्य’ प्रमाण निम्न में से कौनसा प्रमाण है ?
#92. केवल अद्वैतवाद कौनसे आचार्य ने बताया हैं?
#93. उपमान के प्रकार है।
#94. चरकानुसार सत् एवं असत् परीक्षा हेतु प्रमाण है।
#95. अरुणदत्त के अनुसार सप्तविध कल्पना के आश्रय है ।
#96. परामर्शजन्यं ज्ञानम्
#97. काल में प्रशस्तपादोक्त गुण है।
#98. चरकोक्त सामान्य प्रकार है ।
#99. ब्रह्मसूत्रों की रचना की है।
#100. त्रैकालिकोऽभाव…….. ।
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